नई तकनीकों के साथ करवाया जा रहा पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव का दौर है। गाँव बिहार के लिए क्या है, इसे शब्दों में बयां करने की जरुरत नहीं है। ये तो हम सभी बचपन से ही सुनते आ रहे है कि भारत गाँवों का देश है। महात्मा गाँधी ने कहा था कि ‘भारत की आत्मा यहाँ के गाँव में बस्ती है।‘ इस बात से ही हम इस चुनाव की अहमियत का अंदाज़ा लगा सकते है। आधी से अधिक आबादी गाँव में रहती है। लोग काफी उत्साह के साथ अपना नेता चुन रहे है। गाँव की जनता अपने गाँव के पांच को कई तरह की ताकतें देती है। सिर्फ शक्तियां ही नहीं एक नेता को कई तरह की जिम्मेदारियां भी मिलती है जैसे कि सड़को का रखरखाव, स्वछता, पशुपालन व सिंचाई के साधन के साथ-साथ शिक्षा की भी ज़िम्मेदारियाँ। ग्यारह चरणों में होने वाले इस चुनाव में कई नयी चीज़ों को भी शामिल किया गया है जैसे कि पहली बार हर फेज़ के मतदान के बाद ही वोटों की गिनती की जा रहीं है। इसका मतलब ये है कि चुनाव के मात्र 48 घंटों के बाद ही विजेता अपनी जीत का जश्न मना रहे है। वहीँ इस बार नई तकनीक के साथ चुनाव हो रहा है तो इस पर चर्चा करना भी सव्भाविक है। मालुम हो कि ये पहला मौका है जब पंचायत चुनाव में ईवीएम तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है।
बता दें कि ये पंचायत चुनाव छः पदों पर हो रहा है। जहाँ पंच और सरपंच का चुनाव बैलेट पेपर पर करवाया जा रहा है। वहीँ वार्ड सदस्य, जिला परिषद सदस्य, मुखिया और पंचायत समिति सदस्य का चुनाव इवीएम के जरिये हो रहा है। अभी बिहार में हज़ारों पंचायत में लाखों पदों पर चुनाव हो रहा है। इस बार के चुनाव में ओसीआर तकनीक के इस्तमाल से इतिहास रचा गया है। दुनिया में पहली बार इस तकनीक के जरिये मशीन की सहायता से ही वोटों की गिनती हो गयी है।
आधुनिकता के इस दौर में डिजिटल प्लेटफार्म का अपना ही एक अलग महत्व है। मतदाता का सूचि में नाम है या नहीं इसे आसानी से चुनाव आयोग की वेबसाइट पर देखा जा सकता है। सिर्फ इतना ही नहीं वेबसाइट के जरिये अपने मतदान केंद्र के बारे में भी हर तरह की जानकारी इकठ्ठा की जा सकती है। कई लोगो को पढ़ने में परेशानी होती है इस बात का भी खास ख्याल रखते हुए पदों के लिए रंगो का चयन किया गया है। ग्राम पंचायत सदस्य की पेटी का रंग काला, मुखिया की पेटी का रंग हरा, पंचायत सदस्य का रंग नीला तो ग्राम कचहरी का रंग पीला इत्यादि है। चुनाव से जुडी कई तरह की जानकारियां इस वेबसाइट पर मौजूद है। इसके अलावा टॉल फ्री नंबर के जरिये भी चुनाव से जुडी जानकारी ली जा सकती है। इसके साथ ही मतदाता केंद्रों पर कोरोना प्रोटोकॉल के पालन होने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इस बार बायोमेट्रिक के जरिये सही मतदाता की पहचान भी की जा रही है।
- साक्षी शिवा
Comments
Post a Comment