अनचाहे यौन उत्पीड़न से मानसिक परेशानी का खतरा

बिहार लीगल नेटवर्क व इजार्ड ने किया राज्य स्तर कार्यशाला का आयोजन

पटना: भारत में लगभग हर महिला छेड़खानी का शिकार होती है। हमारा कानून महिलाओं को कई तरह के अधिकार देता है, लेकिन छेड़खानी, गैंगरेप, दुष्कर्म या किसी भी प्रकार के यौन हिंसा का शिकार होने पर ज्यादातर महिलायें चुप रह जाती है। कभी समाज के डर से तो कभी बदनामी के डर से अकसर ऐसी घटनाएं सामने ही नहीं आ पाती है। हमारे समाज में बहुत सारे लोग ऐसे है जो अपराधी को नहीं बल्कि जिसके साथ हिंसा हुई है उसे ही दोषी ठहरा देते है। लेकिन ऐसी घटनाओं का विरोध करना बहुत ही जरुरी है। वहीँ इस तरह की घटनाएं जिसके भी साथ होती है उसके मानसिक स्वास्थ को गहरा धक्का लग सकता है। इसी बात का ध्यान रखते हुए राजधानी के संपत्तचक प्रखंड में स्थित द इगल व्यू होटल में बिहार लीगल नेटवर्क व इजार्ड के द्वारा राज्य स्तर पर उपचारात्मक या हीलिंग कार्यशाला का आयोजन हुआ। एक दिवसीय कार्यशाला में 50 से अधिक पीड़िता ने भाग लिया जो इस परेशानी की शिकार हो चुकी थी। मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डॉ॰ मनोज कुमार भी इस मौके पर मौजूद रहे। इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ॰ मनोज कुमार ने बताया कि जबरदस्ती किये गये यौन व्यवहार का असर काफी गहरे रूप में मन और मस्तिष्क दोनों पर पर पड़ता है। बचपन के दिनों में किसी अपने या भरोसेमंद व्यक्ति के द्वारा गलत तरीके से स्पर्श करना भी कोमल मन पर लंबे समय तक असर डालता है। बहुत बार तो व्यक्ति इस तरह के अनुभव कभी भी भूल नहीं पाता है। इसका नतीजा ये होता है कि गुस्सा, चिड़चिड़ापन व एकाकी जीवन में पीड़ित व्यक्ति विश्वास करने लग जाता है। अनचाहे यौन उत्पीड़न की वजह से मानसिक रूप से बीमार होने की संभावनाए बढ़ जाती है। ऐसा होने पर पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर जैसी मानसिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है। मालूम हो कि इस डिसऑर्डर में व्यक्ति अपने साथ घटी घटनाओं पर वर्तमान में प्रतिक्रया देने लगता है। जिसकी वजह से पुरानी घटना बार-बार याद आती है। बुरे सपने आने लगते है और किसी और चीज़ में ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता हैं। डॉ॰ मनोज कुमार आगे बताते है कि इस परेशानी में व्यक्ति को बुरे अनुभव का पिक्चर बार-बार दिमाग में आता रहता है। व्यक्ति अपने विचारों में खराब अनुभवों को जिंदा रख लेता है। जिससे उसका वर्तमान जीवन प्रभावित होकर उसके व्यक्तिगत क्षमता को खत्म कर देता है। अधिकतर मामलों में व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। कुछ मामलों में आत्महत्या का प्रयास और कुछ में जीवन की समाप्ति की वजह यौन उत्पीड़न ही है। इस घटना से पीड़ित छात्राओं को संबोधित करने के दौरान डॉ॰ मनोज कुमार ने ये जानकारी दी कि जब आपको कोई व्यक्ति गलत तरीके से छुता है तो ऐसे हालत में महिला थाने, महिला हेल्पलाइन और सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी हेल्पलाइन नं पर सूचना देना चाहिए। समाज में पीड़ित को किसी भरोसेमंद व्यक्ति से अपनी बातों को जरुर साझा करनी चाहिए। रेप और यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं व युवतियां अपनी आवाज बुलंद करके भी इस तरह के होनेवाले मानसिक समस्या से अपना बचाव कर सकती हैं। इस अवसर पर संस्था की प्रमुख व पटना उच्च न्यायालय की वरिय एडवोकेट सविता अली ने ये जानकारी दी कि उनका संगठन विगत कुछ वर्षों से समाज में इस परेशानी से पीड़ित महिलाओं के लिए फ्री कानूनी मदद मुहैया करा रही हैं। उन्होनें ये भी जानकारी दी कि अधिकतर रेप पीड़ित महिलाएं डर कर चुप रह जाती हैं। इज्जत के डर से के वह अपना आत्मसम्मान तक खो देती है। समाज को इस तरह की घटनाएं झेल चुकी लड़कियों के साथ बिलकुल भी भेदभाव नही करना चाहिए।
साक्षी शिवा

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