जींस।
कपड़ों की भी अपनी अलग ही कहानी हैं। ये भी एक अलग किस्सा बयां करती है। कभी इससे हमारी संस्कृति तो कभी हमारा संस्कार झलकता है। कभी ये हमारी खूबसूरती बढ़ाती हैै तो कुछ लोग इससे दूसरों के चरित्र को भी समझ लेते है।
ये ज़िन्दगी का एक हिस्सा है। ये त्योहारों की खुशी है और यही हमारे चेहरे की मुस्कान भी है। सबका अपना अपना शौक़ है और सबकी अपनी अपनी चाहत है। किसी को साड़ी और सलवार कमीज़ पसंद है तो किसी को जीन्स और टॉप पसंद है। पर जीन्स में ऐसी क्या बात है जो ये भी एक मुद्दा है?
कभी किसी कॉलेज में जीन्स पहनने पर रोक लगाने की खबर आती है तो कभी किसी गांव में इसपर फतवा लग जाता है। कुछ तो बात ज़रूर होगी। या फर्क सिर्फ हमारी सोच का है? क्यों हमें साड़ी संस्कारी और जीन्स..... ख़ैर रहने देते है ।
(Name - Sakshi Shiva)
शानदार कटाक्ष 👍
ReplyDeleteशुक्रिया 🤗
Deleteकपड़े पहनने की भी आज़ादी होनी चाहिए
ReplyDeleteजी बिल्कुल । 🙂
Deleteसंस्कृति सही से होना चाहिए
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ReplyDeleteNicely written .. Keep writing 👍👍
ReplyDeleteThank you 😊🥰
DeleteNycc👍👍
ReplyDeleteThank you 🤗
Deleteबहुत अच्छा प्रयास, इसको आगे भी जारी रखें
ReplyDeleteजी जरूर... शुक्रिया।
DeleteSome people must have to understand this. . Bhut khub yr
ReplyDeleteThank you 😊🤗
Deletejust keep going..we all r ur best supporter..i really appreciate.
ReplyDeleteThank you 😊🤗🙏
DeleteSupb.....👌
ReplyDeleteSupb.....👌
ReplyDeleteThank you 😊
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