जींस।

कपड़ों की भी अपनी अलग ही कहानी हैं। ये भी एक अलग किस्सा बयां करती है। कभी इससे हमारी संस्कृति तो कभी हमारा संस्कार झलकता है। कभी ये हमारी खूबसूरती बढ़ाती हैै तो कुछ लोग इससे दूसरों के चरित्र को भी समझ लेते है। 

ये ज़िन्दगी का एक हिस्सा है। ये त्योहारों की खुशी है और यही हमारे चेहरे की मुस्कान भी है। सबका अपना अपना शौक़ है और सबकी अपनी अपनी चाहत है। किसी को साड़ी और सलवार कमीज़ पसंद है तो किसी को जीन्स और टॉप पसंद है। पर जीन्स में ऐसी क्या बात है जो ये भी एक मुद्दा है? 

कभी किसी कॉलेज में जीन्स पहनने पर रोक लगाने की खबर आती है तो कभी किसी गांव में इसपर फतवा लग जाता है। कुछ तो बात ज़रूर होगी। या फर्क सिर्फ हमारी सोच का है? क्यों हमें साड़ी संस्कारी और जीन्स..... ख़ैर रहने देते है ।

(Name - Sakshi Shiva)

Comments

  1. शानदार कटाक्ष 👍

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  2. कपड़े पहनने की भी आज़ादी होनी चाहिए

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  3. संस्कृति सही से होना चाहिए

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. Nicely written .. Keep writing 👍👍

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  6. बहुत अच्छा प्रयास, इसको आगे भी जारी रखें

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  7. Some people must have to understand this. . Bhut khub yr

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  8. just keep going..we all r ur best supporter..i really appreciate.

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