ये न हिन्दू देख रहा है, न मुसलमां देख रहा है।

ये मत पूछो कि ये,
किसे मार रहा है।
ये न हिन्दू देख रहा है,
न मुसलमां देख रहा है,
ये तो बस, इन्सा देख रहा है।
अब तो ये भी सुना कि,
बाघ भी इससे नहीं बचा है।
ये न जाति देख रहा है,
न कोई धरम देख रहा है।
बीमारी है ये बस,
बीमार कर रहा है।
ये मत पूछो कि ये,
किसे मार रहा है।
ये न हिन्दू देख रहा है,
न मुसलमां देख रहा है।
बीमारी है ये बस,
बीमार कर रहा है।
(साक्षी शिवा)

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