हम और तुम (कविता)
वो नाराज़ थे हमसे,
हम नाराज़ थे उनसे।
वो परेशान से थे,
और हम हैरान से थे।
ज़िन्दगी चल रही थी,
रुक गए थे हम।
एक तब का वक़्त था,
और एक आज का वक़्त है।
तुम भी खुश थे,
और हम भी खुश थे।
एक तब का वेलेंटाइन था,
और एक आज का वेलेंटाइन है।
तब तुम पास थे,
अब तुम नाराज़ हो।
तब हम खुशमिजाज थे,
आज हम गमगीन है।
हम shuttlecock के जैसे हो गए है,
कभी इस पार कभी उस पार।
चलो ना कुछ काम करते है,
तुम हमे समझो,
हम तुम्हे समझते है ।
क्यों ना फिर से हम हंसते है।
तुम मुझे मनाओ,
मै तुम्हे मनाती हूं ।
उलझने तो रहेगी,
उन्हें सुलझाते है,
चलो ना फिर से मुस्कुराते है ।
हम नाराज़ थे उनसे।
वो परेशान से थे,
और हम हैरान से थे।
ज़िन्दगी चल रही थी,
रुक गए थे हम।
एक तब का वक़्त था,
और एक आज का वक़्त है।
तुम भी खुश थे,
और हम भी खुश थे।
एक तब का वेलेंटाइन था,
और एक आज का वेलेंटाइन है।
तब तुम पास थे,
अब तुम नाराज़ हो।
तब हम खुशमिजाज थे,
आज हम गमगीन है।
हम shuttlecock के जैसे हो गए है,
कभी इस पार कभी उस पार।
चलो ना कुछ काम करते है,
तुम हमे समझो,
हम तुम्हे समझते है ।
क्यों ना फिर से हम हंसते है।
तुम मुझे मनाओ,
मै तुम्हे मनाती हूं ।
उलझने तो रहेगी,
उन्हें सुलझाते है,
चलो ना फिर से मुस्कुराते है ।
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