आरंभ (एक कविता)
तू आरंभ कर खोज कर,
जीवन के लक्ष्य की।
सत्य के परिपेक्ष्य की।
प्रारम्भ कर जीत की,
बोध कर, शोध कर ।
ज्ञान की खोज कर,
लक्ष्य को तू प्राप्त कर,
इस सफर की शरुआत कर।
जीवन के लक्ष्य की।
सत्य के परिपेक्ष्य की।
प्रारम्भ कर जीत की,
बोध कर, शोध कर ।
ज्ञान की खोज कर,
लक्ष्य को तू प्राप्त कर,
इस सफर की शरुआत कर।
👌👌👌
ReplyDeleteThank you 😊
Deleteबहुत खूब. आपकी इजाज़त हो तो अपने फेसबुक टाइमलाइन पर पोस्ट करना चाहूंगा.
ReplyDeleteधन्यवाद🙏🏻😊 जी जरूर कीजिए पर कृपया मेरे नाम के साथ करे । (साक्षी शिवा)
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